लिखीत
तेरे हाथों के लिखीत मे ,
तेरे हाथों की खुशबू थी,
वहीं मेरे होठो पे मुस्कूराहट थी,
और वही अपना पन. . ... .
अब तेरे संदेश मे ना
तेरे हाथों की खुशबू है,
ना मेरे होठो पे मुस्कूराहट,
और ना वोअपना पन....
है तो वो सिर्फ अहसास.. !
जहाँ हम उम्मीद लेकर बैठे है.
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वर्षा प्र पाटील. ©®
उरण नवी मुंबई
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