सच

   सच कडवा क्यू है, और झूठ मधूर क्यू है, लोग झूठ सुनना ज्यादा पंसद करते है, क्यू ? अगर ऐसा ना होता तो,? तो रामायण ,महाभारत का इतिहास अलग होता. धोबी सिता मय्या के बारे मे झूठ ना बोलता श्रीराम ना उसे त्याग  देते. और लवकुश आश्रम मे ना जन्म लेते, ना ही वो(सिताजी) धरती मे समा जाने की बात करती, 

ना महाभारत मे कुंती अपने जेष्ठ पुत्र को खो देती, ना ही कर्ण अपने चार अच्छे विचार के भाईयों को खोकर  दुर्याेेधन के पास जाता, नाही धर्म अपने गुरू से जीवनभर का एकही झूठ बोलता,

झूठ से विनाश है ये पता होकर भी हर एक झूठ बोलता है क्योंकी झूठ से राहत मिलती है, 

सच ,सच है, सच आईना है ,फिर भी सच से मुहँ मोडके सच को ठुकराके, सब झूठ का सहारा लेते है, क्योंकी सच का आईना संदरता नही दिखाता, सत्य किसको पसंद नही आता.


जिनके विचार मे ताकद है, जिन्हे जिवन का अर्थ मालुम है वो सच और झूठ के फेरे मे नाही अटकते,वो सच का स्विकार करके अपना जिवन व्यतित करते है, 

झुठ हर जगह है, लेकीन नेचर मे प्राणि मात्रा मे पशू पक्षीयोंमे नही है,  पानी मे ,हवा मे नही है, झूठ एक विचार की धारा है, वो गलत है और सिर्फ मानव जाती मे है, 

जब जब अधर्म बढता गया, तब उसने झुठ और हिंसा का सहारा लिया, और प्रकृती के विरूद्ध संहार किया, 

हम जब भी जय श्रीराम कहते है, तो हम अपने आप से सच का वादा करते है, पता नही लेकीन सत्य युग की जरूरत हर एक युग मे पडी है/

जय श्रीराम🌹🙏🙏🌹

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वर्षा प्र पाटील. ©®

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