सिलसिला

 


गुनाह किसी और ने किया

और  ख्वाब हमारे तुट गए 

कत्ल किसी और ने किया

और सजा हमने पायी

बेवफा  कोई और था

और बदनाम हम हुए

मकान किसी और ने तोडा

और बेघर हम हो गए 

पैगाम किसी और के

लिए था, और मरना

हमें पडा....

ये सिलसिला बरसों से

चालू रहा,रोकने वाला

कोई न था.. 

हाथ अपनोंने छोडा 

थामने वाला कोई न था... .


वर्षा पाटिल ©️®️🌹



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