"जख्म"

हमने भी जख्म खाए है

उनके नाचीज हरकतोंसे

हम  भी बेवक्त शिकार हुए है

उनके तरकिब भरे कारनामोंसे

इसलिए ... 

हम भी बनाते चले है कारवाँ

मंझिंल तर पहूँचने के लिए


वर्षा प्र पाटील. 
लोनी, कारभोर

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