भाग 8 भेड़िया
पुलिस स्टेशन मध्ये रिमांड होम मध्ये घेवून जाण्यासाठी आलेली टीम दुपारच्या जेवणाच्या वेळेस इथे तिथे पांगली. आणि तिथे टेबल जवळ बसलेली. एकच कार्यकरती आपले पेपर घेवून बसली होती. ती बरेच पेपर वाचत होती. नगमाला थोडा धीर आला. नगमाने तिला हलकेच आवाज दिला, तिने तिला ह, बोल तिच्या कडे न बघताच म्हणाली. Nagmane बोलायला सुरुवात केली.
मॅडम जी, रिमांड होम मतलब अनाथ बच्चे होते हैं जिन्हें कोई नहीं वहीं है ना?
हा लेकीन अगर उनके मा बाप रिलेटिव्हज मिल जाते है तो उनके पास हम भेज देते है. हम और पुलीस हर तरह से कोशीश करते है की उनके मा बाप मिल जाए. तब तक हम उनका ध्यान रखते है,उनको पढाई करने के लिए स्कूल भेजते है, तो वो आवारा नही बनते. उनका खर्चा कौन करता है,उनके लिए बडी बडी संस्था काम करती है,वो पैसौ की मदत करती है,
आप काम करती है क्या उधर? नही मै एक जगह पर काम नही करती. मै सोशल वर्कर हूॅ. नगमा अब तुम्हारा प्राब्लम खत्म हुआ है, तुम्हे कल से पुलीस स्टेशन नही आने का है कभी कुछ जाॅच पडताल का काम होगा तो एक दिन बुलाएंगे फिर से नगमा उसको बोली मॅडम मैने लडकी को 10दिन संभाला है,तो मै क्या बता रही थी.तभी नगमा घर जाते समय मै तूम्ही पैसे भेज देंगी.नही मॅडम,..
सोशल वर्कर ने अपना पेन पटका और नगमा अब तुझे कुछ और बताना है क्या? क्या प्राब्लम है तुम्हारी.?
नगमा की नजर नीचे गयी और वो बोली मॅडम मै लडकी को नही देती..
वाॅट?ऐसे तुम तुम्हारे पास लडकी क नही रख सकते.कानून के कुछ रूल होते है? फिर भी मॅडम आप सोच लो?
सोशल वर्कर ने नगमा की तरफ देखा और पुछा इस लडकी वो आपके पास अच्छा घर,संस्कार, शिक्षा नही मिल सकती. तुम्हे भी पैसौ की दिक्कत आ सकती है.
हम उसके मा बाप धुॅढने मे मदत करेंग
और उनको कहोगे हमने आपकी लडकी को संभाला तो हमे पैसै दो.ऐसा नही चलता.
नही हम उसे माॅ जैसा प्यार देंगे और उसकी अच्छे से हिफाजत करेंगे जब तक उसकी मां नही मिल सकती...
क्रमंश
वर्षा पाटील.
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